रायपुर, 21 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची (टेंटेटिव लिस्ट) में शामिल किया गया है। इससे सिरपुर को भविष्य में विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की राह मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी 1 जनवरी 2026 को सिरपुर के ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण कर इनके संरक्षण तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासों पर जोर दिया था।
प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से प्रसिद्ध सिरपुर पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी और धर्म-संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां स्थित सातवीं शताब्दी का प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर, गंधेश्वर महादेव मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार और सुरंग टीला इसकी ऐतिहासिक समृद्धि के प्रमुख प्रमाण हैं।
पुरातात्विक उत्खनन में यहां दो हजार से अधिक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं। सिरपुर की विशेषता शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं का ऐतिहासिक सहअस्तित्व तथा उत्कृष्ट ईंट स्थापत्य और धातु मूर्तिकला है।
यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा नहीं है, बल्कि नामांकन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। इस उपलब्धि से सिरपुर में देश-विदेश के पर्यटकों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का आकर्षण बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही होटल, होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
