रायपुर, 15 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए गन्ने का खरीदी मूल्य 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के बाद गन्ना किसानों को अब प्रति क्विंटल 70 रुपये अधिक मिलेंगे। खास बात यह है कि बढ़ी हुई दर पेराई सत्र 2025-26 से ही लागू होगी। इस सत्र में पहले ही गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़े हुए मूल्य के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
राज्य सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी। नई दर के साथ छत्तीसगढ़ में गन्ने का खरीदी मूल्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों से भी अधिक हो गया है। इस तरह गन्ना किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली ही छत्तीसगढ़ की समृद्धि का आधार है। सरकार का संकल्प है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिले, खेती लाभकारी बने और किसान परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हों। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि लागत कम करने की दिशा में लगातार काम कर रही हैं। राज्य सरकार किसानों के हितों को अपनी नीतियों और निर्णयों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है।
चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की चार सहकारी चीनी मिलों से जुड़े 31 हजार से अधिक किसानों को लगभग 51.09 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया जाएगा। गन्ना खरीदी मूल्य में बढ़ोतरी और बोनस वितरण से किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा। सरकार का मानना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
राज्य में पहले गन्ने की खरीदी 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती थी। अब इसे बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इससे किसानों को उनकी कुल गन्ना बिक्री के अनुपात में अतिरिक्त आमदनी होगी। नई दर पहले गन्ना बेच चुके किसानों पर भी लागू होने से चालू पेराई सत्र में अपनी उपज की आपूर्ति कर चुके किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से अधिक हुआ खरीदी मूल्य
गन्ना खरीदी मूल्य के मामले में छत्तीसगढ़ ने प्रमुख उत्पादक राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अगैती प्रजाति के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं, छत्तीसगढ़ में अब गन्ने का खरीदी मूल्य 425 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने का भुगतान केंद्र सरकार के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के आधार पर निर्धारित होता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
खेती को लाभकारी बनाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और खेती को सम्मानजनक एवं लाभकारी आजीविका बनाना है। गन्ना खरीदी दर में वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर मूल्य मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और वे खेती से जुड़े अपने आर्थिक निर्णय अधिक मजबूती के साथ ले सकेंगे।
गन्ने का बेहतर मूल्य मिलने से आने वाले समय में किसान गन्ने की खेती के रकबे, उत्पादन लागत और संभावित लाभ का नए सिरे से आकलन कर सकेंगे। इससे गन्ने की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। प्रदेश में चार सहकारी शक्कर कारखाने संचालित
छत्तीसगढ़ में गन्ना उत्पादन के मामले में प्रदेश का देश में 14वां स्थान है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 18.6 लाख से 20.4 लाख टन गन्ने का उत्पादन होता है। यहां चार प्रमुख सहकारी शक्कर कारखाने संचालित हैं। इनमें भोरमदेव सहकारी चीनी मिल, कवर्धा; महामाया सहकारी चीनी मिल, सूरजपुर; सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी चीनी मिल, पंडरिया (कबीरधाम); और मां दंतेश्वरी मैय्या सहकारी चीनी मिल, बालोद शामिल हैं।
प्रदेश के कबीरधाम, सूरजपुर, जगदलपुर, सरगुजा, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर क्षेत्रों में गन्ने की खेती की जाती है। कबीरधाम, जगदलपुर और सरगुजा को प्रमुख उत्पादन वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि किसानों की खुशहाली, कृषि को लाभकारी बनाना और गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। गन्ना खरीदी मूल्य में यह वृद्धि इसी दिशा में उठाया गया कदम है, जिससे हजारों किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।