रायपुर, 10 सितंबर 2026। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर एवं छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में ‘साइबर जागृति–साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को फिशिंग, UPI और OTP फ्रॉड, सोशल मीडिया पर पहचान की चोरी, सेक्सटॉर्शन तथा ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं रायपुर पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला, एनआईटी रायपुर के निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी, डीसीपी वेस्ट रॉबिन्सन गुरिया (आईपीएस), एडीसीपी साइबर डॉ. गौरव मंडल सहित पुलिस अधिकारी, संस्थान के अधिकारी, संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
लालच, भय और जल्दबाजी से बचने की दी सलाह
एडीसीपी साइबर डॉ. गौरव मंडल ने कहा कि साइबर अपराधी सिर्फ मोबाइल या बैंक खाते को निशाना नहीं बनाते, बल्कि मानव मनोविज्ञान का फायदा उठाकर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। उन्होंने कहा कि लालच, भय, जल्दबाजी और जानकारी का अभाव साइबर ठगी के प्रमुख कारण हैं। विद्यार्थियों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या संदेश पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं देने की सलाह दी गई।
उन्होंने साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर बिना देरी किए 1930 पर कॉल करने तथा साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की।
विद्यार्थी बनें साइबर स्वयंसेवक
एनआईटी रायपुर के निदेशक (प्रभारी) डॉ. समीर बाजपेयी ने विद्यार्थियों को साइबर स्वयंसेवक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक कर सकते हैं।
जागरूकता को बताया साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार
रायपुर पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला ने साइबर धोखाधड़ी को वैश्विक स्वरूप का अपराध बताते हुए कहा कि साइबर अपराध के माध्यम से धनराशि देश से बाहर चले जाने के बाद उसे वापस प्राप्त करना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से साइबर स्वयंसेवक बनने और अपने परिवार तथा परिचितों को भी जागरूक करने का आग्रह किया।
OTP, PIN और पासवर्ड साझा नहीं करने की अपील
मुख्य अतिथि मंत्री दयालदास बघेल ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए नागरिकों से OTP, PIN, पासवर्ड और निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की। उन्होंने साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधों के नए तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। अंत में अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम का समन्वय एडीसीपी वेस्ट राहुल देव शर्मा, एसीपी आजाद चौक इशू अग्रवाल, एनआईटी रायपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार देवांगन तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. नितेश के. भारद्वाज ने किया।