रायपुर। छत्तीसगढ़ जकात फाउंडेशन, रायपुर की ओर से मिशन तालीम के तहत 12वां एज़ाज़ी प्रोग्राम रविवार को शहीद स्मारक ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में रायपुर और आसपास के करीब 350 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। फाउंडेशन के अनुसार वर्ष 2026 में पूरे छत्तीसगढ़ के करीब 1,000 विद्यार्थियों को लगभग 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 68 शिक्षकों का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों, नीट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल विद्यार्थियों, खेल प्रतिभाओं, शैक्षणिक टॉपर्स तथा उर्दू-अरबी कैलीग्राफी और हीना आर्ट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भी सम्मानित किया गया। छात्रवृत्ति मिलने पर कई पालक भावुक नजर आए और उन्होंने फाउंडेशन के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना हाफिज हबीबुर रहमान की तिलावत-ए-कुरआन से हुई। इसके बाद माहिर-ए-हुनर उर्दू क्लास के विद्यार्थियों ने नात-ए-पाक पेश की।
12 साल में 8 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ
फाउंडेशन के कोर सदस्य इनामुल्लाह ने संस्था के 12 वर्षों के सफर की जानकारी देते हुए कहा कि जकात केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि तालीम, रोजगार और उम्मीद की नई रोशनी है। उन्होंने बताया कि अब तक संस्था की ओर से 8 हजार से अधिक छात्रवृत्तियां दी जा चुकी हैं।
फाउंडेशन के अनुसार उसकी सहायता से पढ़ने वाले विद्यार्थियों में अब तक 16 एमबीबीएस डॉक्टर, एक बीडीएस डॉक्टर, करीब 160 इंजीनियर, 10 सीए-सीएमए प्रोफेशनल, 4 नर्सिंग ऑफिसर, 110 से अधिक नर्सिंग प्रोफेशनल, 160 से अधिक फार्मेसी विद्यार्थी, 110 से अधिक आईटीआई विद्यार्थी और करीब 800 ग्रेजुएट शामिल हैं।
संस्थापक सदस्य सैय्यद अकील अहमद ने बताया कि वर्ष 2015 में करीब 9 लाख रुपये और 300 से अधिक विद्यार्थियों से शुरू हुआ छात्रवृत्ति अभियान अब बढ़कर 2026 में 52 लाख रुपये और करीब 1,000 विद्यार्थियों तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि संस्था की मदद से पढ़े कई विद्यार्थी आज अच्छी नौकरियों और व्यवसाय में स्थापित हो चुके हैं और अब जरूरतमंदों की मदद करने की स्थिति में हैं।
टैलेंट सर्च के जरिए मेडिकल कॉलेज तक पहुंचा विद्यार्थी
कार्यक्रम में उस होनहार विद्यार्थी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिसने फाउंडेशन के टैलेंट सर्च एग्जाम के जरिए नि:शुल्क कोचिंग हासिल की और इस वर्ष नीट में सफलता प्राप्त कर शासकीय मेडिकल कॉलेज, महासमुंद में प्रवेश लिया।
वरिष्ठ शिक्षाविद् जनाब जफर अमजद को शिक्षा, उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार और सामाजिक सेवा में लंबे योगदान के लिए “बीकन ऑफ इंस्पिरेशन – मशअल-ए-राह” सम्मान से नवाजा गया।
हुनरमंद बनाने पर जोर
फाउंडेशन के माहिर-ए-हुनर कार्यक्रम के तहत उर्दू पढ़ना-लिखना, उर्दू एवं अरबी कैलीग्राफी, जेनरेटिव एआई, टैली, एमएस ऑफिस, कंप्यूटर, फैशन डिजाइनिंग, मेहंदी-हीना आर्ट और स्पोकन इंग्लिश जैसे प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। संस्था के मुताबिक अब तक 800 से अधिक युवाओं और महिलाओं को विभिन्न हुनर की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले 22 सदस्यीय छात्र वर्किंग ग्रुप को भी सम्मानित किया गया।
अतिथियों ने विद्यार्थियों को दिया सफलता का मंत्र
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ हज कमेटी के चेयरमैन मिर्जा एजाज बेग, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड की सीईओ एवं अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य शम्मी नाहिद और रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी विशेष रूप से मौजूद रहे।
आकाश तिवारी ने विद्यार्थियों से ईमानदारी को जीवन का आधार बनाने की अपील की और शिक्षा के क्षेत्र में फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की। शम्मी नाहिद ने विद्यार्थियों को मेहनत से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए पालकों से बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
मिर्जा एजाज बेग ने कुरआन के पहले संदेश “इक़रा” यानी पढ़ो का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से शिक्षा के जरिए अपने लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया। वहीं अमरजीत सिंह छाबड़ा ने जकात की तुलना सिख समाज की दसवंध परंपरा से करते हुए इसे जरूरतमंदों की सहायता और समाज के उत्थान का माध्यम बताया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और समाजों के बीच समानताओं पर जोर दिया।
शिक्षा के साथ समाजसेवा
फाउंडेशन के अनुसार शिक्षा के साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी संस्था लगातार काम कर रही है। अब तक जरूरतमंद बच्चों को करीब 15 हजार स्टेशनरी किट वितरित की जा चुकी हैं। कोविड काल में 3 हजार से अधिक राशन किट बांटी गईं। जरूरतमंद मरीजों के लिए 25 से अधिक ऑक्सीजन मशीनों की सेवा, राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था और वृक्षारोपण अभियान भी चलाए गए हैं। इसके अलावा करीब 11 वर्षों से “जॉब्स यू लाइक” के माध्यम से युवाओं तक रोजगार के अवसरों की जानकारी पहुंचाई जा रही है।
फाउंडेशन ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल छात्रवृत्ति देना नहीं, बल्कि ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो तालीमयाफ्ता, हुनरमंद और खुद्दार बने और भविष्य में किसी दूसरे जरूरतमंद का सहारा बन सके।