शेख आबिद
जहां पीपीएल से कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 30 के तहत आवश्यक लाइसेंस प्राप्त किए बिना होटल परिसर में आयोजित सभी कार्यक्रमों में पीपीएल से संबंधित ध्वनि रिकॉर्डिंग नियमित रूप से और लगातार जनता के सामने प्रदर्शित की जाती हैं।
फोनोग्राफिक परफॉर्मेंस लिमिटेड एक कंपनी है, जो कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के तहत पंजीकृत है और प्रमुख भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय संगीत कंपनियों का एक संघ है। सभी सदस्य संगीत कंपनियों ने कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 18 और 19 के तहत पीपीएल के पक्ष में सार्वजनिक प्रदर्शन अधिकारों का स्वामित्व सौंपा है। जिसके आधार पर पीपीएल एकमात्र निकाय है जो सदस्य संगीत कंपनियों के स्वामित्व वाली ध्वनि रिकॉर्डिंग के लिए पूरे देश में सार्वजनिक प्रदर्शन लाइसेंस जारी करता है। पीपीएल के पास 400 से अधिक संगीत लेबल के सार्वजनिक प्रदर्शन का अधिकार हैं, जिसमें मुख्यतः टी-सीरीज़, सोनी म्यूजिक, यूनिवर्सल म्यूज़िक, वीनस, स्पीड रिकॉर्ड्स, आदित्य म्यूजिक, आदि शामिल हैं, और जो अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, तेलुगु, मराठी, गुजराती और अन्य भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में ध्वनि रिकॉर्डिंग के विशाल भंडार (फिल्मी या गैर-फिल्मी ध्वनि रिकॉर्डिंग दोनों) तथा बॉलीवुड, ई.डी.एम., हिप-हॉप, पॉप, रॉक, हाउस, इंस्ट्रुमेंटल, शास्त्रीय संगीत इत्यादि शैलियों का मालिक है।
पीपीएल कॉपीराइट अधिनियम की धारा 30 के तहत लाइसेंस जारी करने के लिए अधिकृत भी व्यक्ति को, जो पीपीएल से संबंधित किसी भी ध्वनि रिकॉर्डिंग को किसी भी माध्यम से किसी भी प्रारूप में किसी जनता के लिए या किसी भी व्यक्ति को जो लाभ के लिए ध्वनि रिकॉर्डिंग को प्रदर्शित करना चाहता है, तो उसे पीपीएल से अग्रिम लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके अलावा, सभी सदस्य संगीत लेबल और उनके संबंधित समर्पण पत्र पीपीएल की वेबसाइट पर जनता के लिए उपलब्ध कराया गया है । (लिंक- http://www.pplindia.org/members), इसी तरह पीपीएल के टैरिफ और लाखों गानों की डिटेल भी कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती है। पीपीएल से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त किए बिना, संबंधित ध्वनि रिकॉर्डिंग को चलाने/संचार करने का कार्य कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 51 के तहत कॉपीराइट का उल्लंघन है। कॉपीराइट अधिनियम न केवल उस व्यक्ति के लिए जिम्मेदार है जो सीधे कॉपीराइट का उल्लंघन करता है, बल्कि वह व्यक्ति भी है जो ध्वनि रिकॉर्डिंग में कॉपीराइट के उल्लंघन को बढ़ावा देता है।
हाल ही में, माननीय उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि कॉपीराइट अधिनियम की धारा 63 के तहत दंडनीय अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है।
व्ही.आई.पी. रोड़, रायपुर स्थित होटल ग्रैण्ड इम्पीरिया में पीपीएन से संबंधित गानों की ध्वनि रिकार्डिंग चलाई जाती थी। जिसके विरूद्ध पीपीएल कंपनी के द्वारा उक्त होटल एवं उनके संचालकों के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय मुंबई में प्रकरण दर्ज कराया गया था उक्त प्रकरण में होटल परिसर में गानों को चलाये जाने के लिए पीपीएल से लायसेंस प्राप्त किये बिना चलाये जाने पर माननीय न्यायालय के द्वारा स्थगन आदेश जारी किया गया था। स्थगन आदेश का पालन न कर होटल के संचालकों द्वारा गानों का संचालन जारी रखा गया, जिसके विरुद्ध पीपीएल कंपनी द्वारा होटल के विरुद्ध न्यायालय अवमानना अधिनियम के तहत कार्यवाही के लिए न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया गया। माननीय उच्च न्यायालय मुंबई द्वारा प्रकरण क्रमांक-18649/2024 प्रकरण में आदेश दिनांक 23.12.2025 को न्यायालय अवमानना किये जाने के कारण होटल के संचालकगण के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किया गया है।
पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ सहायक पुलिस महानिरीक्षक नवा रायपुर के द्वारा दिनांक 16.09.2022 एवं जिलाधीश रायपुर के द्वारा दिनांक 30.09.2022 को पत्र जारी कर कॉपीराईड अधिनियम के पालन करने के लिए निर्देश जारी किया गया है लेकिन फिर भी होटलों, रेस्टोरेंटों एवं अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा उक्त अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है। सभी संबंधित व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को कॉपीराईट अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराने हेतु यह प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है।
