शेख आबिद

प्रभु श्रीराम का ननिहाल छत्तीसगढ़ आन अपने स्थापना के रजत जयंती वर्ष पूर्ण कर रहा है। यह प्रदेश अपनी समृद्ध सस्कृति, जनजातीय परंपराओं, सामान्निक समरसता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए जाना जाता है। किन्तुं वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ विशेष रूप से युवाओं में बढ़ते नशा, उससे उत्पन्न अपराधों तथा सापाचिक तनाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसका समाधान समयबद्ध एवं ठोस नीति से किया जाना अपेक्षित है।
राज्य में गांजा, चरस, ब्राउन शुगर, नशीली कफ सिरप एवं सिंथेटिक इमा की सरलता से उपलब्धि के कारण नशा खोरी में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। वर्ष 2025 में कोरबा से 500 कि. ग्रा. से अधिक नशीले पदार्थ, बिलासपुर से 284 कि. ग्रा. गांजा, रामपुर से 132 किलोग्राम से अधिक गांजा जब्त किया जाना यह आका प्रमाण है। राज्य में दर्ज आपराधिक मामलों में अधिकतर मामलों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्बन्ध नशे से पाया गया है। नशे के कारण युवाओं में अपराध, पढ़ाई छोड़ने की प्रवृत्ति, पारिवारिक विघटन और मानसिक स्वास्थ्य जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं जिससे प्रदेश का सामाजिक ढांचा भी प्रभावित हो रहा है। नशीले पदाथों का लगातार बड़ी मात्रा में जब्त किया जाना यह स्पष्ट करता है कि छत्तीसगढ़ अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का एक प्रमुख मार्ग बनता जा रहा है। लगभग हर माह बड़े नशा-नेटवर्क का खुलासा होने के पश्चात भी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का पूर्णकालिक कार्यालय स्थापित ना हो पाना यह चिंता का विषय है।
छत्तीसगढ़ अपनी सामाजिक समरसता और आपसी सम्मान की परफ्य के लिए जाना जाता है किंतु वर्ष 2022 से 2024 के बीच 300 से अधिक आपसी तनाव से जुड़े मामले उजागर होना और अधिकांश मामलों में सोशल मीडिया पर फैली गलत एवं भ्रामक टिप्पणियाँ प्रमुख कारण होना यह समात्रिक सोहार्द को बिगाड़ने के प्रयास बराबर है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मानना है कि भ्रामक जानकारी फैला कर समाज को विभाजित करने का प्रयास करने वाले तत्वों के ऊपर सख्त कानून बना कर राज्य शासन द्वारा कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
कभी नक्सल का गढ़ कहें जाने वाले छत्तीसगढ़ ने बीते एक दशक में आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक प्रगति की है। वर्ष 2010 में दर्ज 400 से अधिक नक्सल घटनाओं की तुलना में वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 150 के आसपास रहना उसकी प्रतीती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आर्केड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से 2023 के बीच देशभर में 8,000 से अधिक नक्सलियों का हिसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण किया जाना यह केन्द्र एवं राज्य सरकार के नक्शल मुक्त भारत के संकल्प को बल देता है। अभाविप का यह 58 वां प्रदेश अधिवेशन नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ एवं नक्सल मुक्त भारत के इस संकल्प के साथ अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता है
अतः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राज्य एवं केन्द्र सरकार से मांग करती है कि

  1. छत्तीसगढ़ में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का पूर्णकालिक कार्यालय शीघ्र स्थापित किया जाए।
  2. नशे से जुड़े अपराधों पर त्वरित जांच और कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा नशा मुक्ति केंद्रों में काउंसलिग एवं रोजगार के साधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
  3. शैक्षणिक संस्थानों में नशामुक्ति जागरुकता, परामर्श एवं पुनर्वास केंद्रों को संस्थागत रूप दिया जाए साथ ही परिसरों में खेल, कौशल विकास और सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।
  4. सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक एवं समाज-विरोधी सामग्री पर सख्त नियंत्रण एवं जवाबदेही तय की जाए। एवं ऐसे तथ्यों पर कानूनी कार्यवाही की जाएणु
  5. क्षेत्रों में सघन सर्च अभियान, स्वावलंबन एवं सुरक्षा सुनिश्चित करें तथा आत्मसमर्पण कर रहे नक्सलियों का पुनर्वास, स्वालंबन एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  6. सामाजिक वैमनस्य कम करने और समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर 2025 में जातिगत रैलियों, सार्वजनिक स्थानों पर जाति के उल्लेख और गाड़ियों पर जाति सूचक स्टिकर लगाने पर लगाए गए प्रतिबंध जैसे निर्णय को छत्तीसगढ़ में भी क्रियान्वित किया जाएण
    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का दृढ़ विश्वास है कि नशामुक्त, नक्सल-मुक्त एवं सामाजिक समरसता से युक्त छत्तीसगढ़ ही प्रदेश की शांति, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास की वास्तविक आधारशिला बनेगा। अभाविप केंद्र एवं राज्य सरकार से अपेक्षा करती है कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर इस दिशा में प्रभावी नीतियाँ लागू करें। साथ ही परिषद समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान करती है कि वे इस महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व में सहभागी बनें