भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर साल आश्विन मास के कन्या संक्रांति पर मनाई जाती है. इस वर्ष यह पर्व 17 सितंबर को मनाया जाएगा। राजधानी रायपुर में भी भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती पर विश्वकर्मा समाज रायपुर द्वारा प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन श्री दुलार धर्मशाला बढ़ई पारा किया गया। श्री विश्वकर्मा पूजा महोत्सव 2025 के अध्यक्ष सन्नी शर्मा ने बताया कि 12 सितंबर को शिवचर्चा धार्मिक कार्यक्रम दुलार धर्म शाला बढ़ई पारा में आयोजिया किया गया। 13 सितंबर को संगीतमय सुंदर कांड एवं चित्रकला,पेंटिंग,पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 14 सितम्बर को खेल कूद बैडमिंटन,कुर्सी दौड़,बास्केटबॉल,बोरा दौड़,एवं सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 15 सितंबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम फैंसी ड्रेस,डांस आदि का आयोजन शहीद स्मारक भवन आयोजन किया गया जिसमें पश्चिम विधान सभा के विधायक श्री राजेश मूणत जी,उत्तर विधान सभा के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा जी,ग्रामीण विधान सभा के विधायक श्री मोतीलाल साहू जी,लौह शिल्पकार कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा जी,रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे जी,तात्यापारा वार्ड की पार्षद जोन 7 की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता विश्वकर्मा जी,इंदिरा गांधी वार्ड के पार्षद श्री अवतार सिंह बागल जी,पार्षद दीपक जयसवाल शामिल हुए। 16 सितंबर को महिला मंडल द्वारा आनंद मेला का आयोजन किया गया। जिसमें समाज के बच्चों एवं युवक युवतियों ने स्वादिष्ट पकवान बनाए। दिनांक 17 सितंबर को सृष्टि के रचयिता भगवान विश्वकर्मा जयंती के दिन भव्य शोभा यात्रा दुलार धर्म शाला से दोपहर 3 बजे निकाली जाएगी। यह यात्रा बढ़ई पारा से प्रारंभ होकर राठौड़ चौक से तेलघानी नाका होते हुए भैंसथान,तेलघानी नाका,अग्रसेन चौक,आमापारा चौक, से आजाद चौक, तात्या पारा चौक होते हुए वापस दुलार धर्मशाला बढ़ई पारा में समाप्त होगी।
अध्यक्ष सन्नी शर्मा ने बताया कि इस दिन को औद्योगिक जगत, तकनीकी पेशों और निर्माण कार्य से जुड़े लोग बड़े उत्साह से मनाते हैं.।विश्वकर्मा जयंती को विशेष रूप से ‘मशीन दिवस’ भी कहा जाता है. परंपरा है कि इस दिन फैक्टरियों, कारखानों, दफ्तरों, दुकानों और घरों में उपयोग होने वाले उपकरणों व मशीनों की सफाई कर उनकी पूजा की जाती है. माना जाता है कि ऐसा करने से कार्यक्षमता बढ़ती है और दुर्घटनाओं से सुरक्षा मिलती है। अक्सर यह भ्रम रहता है कि विश्वकर्मा जयंती केवल कारीगरों या इंजीनियर समुदाय का त्योहार है, जबकि सच यह है कि भगवान विश्वकर्मा को समस्त सृष्टि का प्रथम शिल्पी और वास्तुकार माना गया है. चाहे कोई किसान हो, व्यापारी, शिक्षक या छात्र, हर वर्ग के लिए विश्वकर्मा पूजन शुभ और फलदायी माना गया है.
मान्यता है कि स्वर्गलोक, पुष्पक विमान, द्वारका नगरी और पांडवों की इंद्रप्रस्थ जैसी भव्य रचनाएँ भगवान विश्वकर्मा की ही कृतियाँ थीं. इसलिए वे निर्माण, तकनीक और सृजनशीलता के आद्य देव माने जाते हैं।