शेख आबिद
जीने लायक वेतन दो और पदाधिकारियो पर हो रही बर्खास्तगी की कार्यवाही को वापसे ले
50 वर्ष से मूलभूत सुविधा और जीने लायक वेतन से वंचित है, देश मे आइसीडीएस की स्थापना को हुये लगभग 50 वर्ष होने को है। आंगनबाड़ी केन्द्रो मे देश भर मे लगभग 27 लाख से भी अधिक और छत्तीसगढ़ मे एक लाख से अधिक महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाये कार्यरत है, इन 50 वर्ष मे अब तक सरकार इन्हे ना ही मजदूर मानती है ना ही कर्मचारी बुनियादी सुविधा मुहैय्या करा पाई है और ना ही मूलभूत मांग जैसे जीने लायक वेतन, समाजिक सुरक्षा के रूप मे बुढ़ापे की सहारा पेशन. ग्रेज्युवेटी. समूह बीमा और चिकित्सा सम्मान और शासकीयकरण की मांग को पूरा नही किया है।
कार्यकर्ता सहायिका अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। शासन का ध्यानाकर्षण कर रहे है. अपनी मूलभूत इन मांगो के अलावा. आंगनबाड़ी केन्द्र के संचालन मे हितग्राहियो को शासन का लाभ दिलाने मे शासन की मंसा अनुरूप कार्य करने मे कई सारे कठिनाई आ रही है.।
वर्तमान स्थिति मे सरकार के तरफ से केन्द्र संचालन के लिये झाडू. पोछा. फिनाईल. बाल्टी. मग्गा . कागज. फोटोकापी इत्यादी के लिये भी कोई कन्टीजेसी राशि नही मिलती और मिलती भी है तो उसे अधिकारी अपने पास मंगा लेते है और अपने अनुसार खरीदी करते हैं। सरकार द्वारा आंगनबाड़ी का काम अब पूर्ण डिजीटलाईज कर दिया गया. पोषण आहार वितरण, टी एच आर. फेस कैपचर. सम्मान निधि प्रणाली से कार्यकर्ता. बच्चो. केन्द्र के गतिविधियो का फोटो कैप्चर. हितग्र हियो से ओटीपी लेना रिकार्ड ये सब मोबाईल के माध्यम से ही करना है. लेकिन 5 जी मोबाईल की उपलब्धता नही. नेट चार्ज राशि नही है. दुराचंल वनांचल मे नेट ब्यवस्था नही है. शासन प्रशासन का इस ओर ध्यान नही है।
आंगनबाड़ी केन्द्रो के संचालन मे आ रही समस्याओ संसाधनो की कमी और अपनी मूलभूत सुविधाओ के साथ इन आवश्यक संसाधन जुटाने की बात यदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहिकाओ के नेतृत्वकर्ता, विभागीय अधिकारी से करते है, और समस्याओ के निराकरण करने की बात मुखरता से रखते है, तो शासन प्रशासन द्वारा इनकी आवाज को दबाने का काम किया जा रहा है। अधिकारियो द्वारा हक और अधिकार की लड़ाई, प्रजातांत्रिक अभिव्यक्ति के अधिकार को छिनने की लगातार कोशिश की जा रही है और संयुक्त मंच के पदाधिकारियो को डराने. धमकाने की कार्यवाही की गई जा रही जिसका संयुक्त मंच कड़े शब्दो मे निंदा करती है।
समर्थन मे काम बंद कर सड़क पर उतरी थी, सरकार की उदासीनता के कारण पुनः 19 तारिक को रायपुर में प्रान्तीय स्तर का कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया है धरना रैली प्रदर्शन कर मान. प्रधान मंत्री. भारत सरकार एवं मान. मुख्यमंत्री छत्तीसगढ सरकार के नाम ज्ञापन सौपी जायेगी। अगर हम पर भी सरकार अनदेखा करती है तो मजबूरन अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाध्य होंगे।
संयुक्त मंच की 8 सूत्रीय मांगः-
1- देश मे 50 वर्ष से लागू आई सी डी एस योजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रो मे कार्यरत कार्यकर्ता सहायिकाओ को भी. शिक्षाकर्मी. पंचायत कर्मी. की तरह शासकीय करण की नीति बनाकर शासकीय कर्मचारी घोषित किया जावे और कार्यकर्ता को तृतीय श्रेणी और सहायिका को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित किया जावे।
2-शासकीय कर्मचारी घोषित होते तक पूरे देश मे एक समान वेतन कार्यकर्ता को प्रतिमाह 26000/- और सहायिका को 22100/-(कार्यकर्ता का 85%) शीघ्र लागू किया जावे।
3- समाजिक सुरक्षा के रूप मे सेवानिवृत्ति पर सभी कार्यकर्ता सहायिकाओ को पेंशन. ग्रेज्युवेटी. समूह बीमा और कैशलेश चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जावे।
4-सहायिका को कार्यकर्ता के पद पर और कार्यकर्ता को सुपरवाईजर के पद पर सिधे पदोन्नति दिया जावे। जिस तरह से सन् 1998-99 मे नीति बनाकर किया गया था।
5-सरकार द्वारा वर्तमान मे पोषण ट्रेकर. THR वितरण मे फेस केप्चर. कार्यकर्ता सहायिकाओ के उपस्थिति का फेस केप्चर FRS और e-KYC के माध्यम से केन्द्र के सभी कार्य को डिजिटल किया गया है. जिससे हितग्राहियो को और कार्यकर्ता सहायिकाओ को कई ब्यवहारिक परेशानी और कठिनाईयो का सामना करनी पड़ रही है. इसे बंद कर आफ लाईन सभी कार्य लिया जावे।।
6:-मंहगाई भत्ता दिया जावे.मान. उच्च न्यायालय गुजरात द्वारा ग्रेज्युवेटी और न्यूनतम वेतन के संबध मे पारित निर्णय को छत्तीसगढ़ मे भी लागू किया जावे।
7:-सेवा निवृत्ति पश्चात पेंशन ग्रेजुवेटि:- 35-40 वर्ष विभाग की सेवा करने के बाद भी बुढ़ापे के समय जीवन यापन हेतु ना तो कोई पेंशन मिल रहा है और ना ही एक मुश्त राशि कार्यकर्ता को ₹10000/और सहायिका को ₹8000/मासिक पेंशन और बुढ़ापे के शेष जीवन यापन के लिए कार्यकर्ता को 5 लाख रुपयेऔर सहायिका को 4 लाख रुपये एक मुस्त ग्रेजुवेटि राशि प्रदान किया जावे।
8:- अनुकंपा नियुक्ति :- कार्यकर्ता सहायिका के आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिया जावे।
