आबिद रायपुर
रायपुर। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने प्रदेश के शिक्षकों की लंबित मांगों के निराकरण को लेकर 15 जुलाई को विधानसभा घेराव करने की घोषणा की है। यह निर्णय रविवार को लगभग चार घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद लिया गया।
प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने बताया कि फेडरेशन मानसून सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव कर सरकार को शिक्षकों से किए गए वादों की याद दिलाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षकों की जायज मांगों को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। राठौर ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले अपने संकल्प पत्र “मोदी की गारंटी” में प्रदेश के सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने तथा क्रमोन्नत वेतनमान देने का स्पष्ट वादा किया था, लेकिन आज तक इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के मुद्दे पर भी चिंता जताते हुए कहा कि वर्ष 2017 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन के बाद टीईटी को अनिवार्य योग्यता बनाया गया, लेकिन उस समय देशभर के सेवारत शिक्षकों को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 30 अगस्त 2028 तक आवश्यक योग्यता प्राप्त करने का समय दिए जाने के बावजूद वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करने की तैयारी की जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है।
राठौर ने कहा कि यदि किसी शिक्षक ने अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं किया है तो इसके लिए शिक्षा विभाग भी जिम्मेदार है, क्योंकि विभाग ने कभी यह स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया कि सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्य है। उन्होंने मांग की कि अन्य राज्यों की तरह
छत्तीसगढ़ सरकार भी सेवारत शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी आयोजित कर आवश्यक पात्रता दिलाने का रास्ता निकाले।
फेडरेशन की एक अन्य प्रमुख मांग यह है कि आठ वर्ष की सेवा पूरी कर शिक्षा विभाग में संविलियन प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों की पूर्व सेवा की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए तथा शिक्षा विभाग से मिलने वाले सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
प्रदेश अध्यक्ष ने वीएसके (VSK) एप को लेकर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि तकनीकी समस्याओं के कारण शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचने के बावजूद उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में वेतन कटौती की चेतावनी देना उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि पहले एप की तकनीकी खामियों का समाधान किया जाए, उसके बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज भी हजारों विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। फेडरेशन ने शिक्षा विभाग से ऐसे विद्यालयों में शीघ्र शिक्षकों की पदस्थापना करने की मांग की है।
युक्ति युक्तकरण के तहत मर्ज की गई स्कूलों में वित्तीय पारदर्शिता बरतने एवं दोनों स्कूलों में बेहतर कार्य सम्पादित करने के लिए दोनों प्रधान पाठक मिडिल और प्राइमरी को वित्तीय भागीदारी देते हुए सचिव और कोषाध्यक्ष बनाया जाए तत्काल प्रबंध समिति के खाते के स्पेसिमेंट में बदलाव किया जाए ताकि स्कूल बेहतर तालमेल से संचालित हो सके यह मांग भी प्राथमिकता के साथ विभाग पूरी करे।
राठौर ने बताया कि 6 जुलाई को फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल स्कूल शिक्षा सचिव से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराएगा तथा शीघ्र समाधान की मांग करेगा। इसके बाद प्रथम चरण में 7 जुलाई से 13 जुलाई तक प्रदेशभर के विधायक एवं सांसदों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। यदि इसके बाद भी सरकार मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 15 जुलाई को राजधानी रायपुर के तूता क्षेत्र में प्रदेशभर से हजारों सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठक एकत्र होकर विधानसभा घेराव करेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करेंगे।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए प्रांतीय पदाधिकारियों को विभिन्न जिलों का प्रभारी नियुक्त किया गया है। ये पदाधिकारी जिलों का दौरा कर शिक्षकों से संपर्क करेंगे तथा अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल होने का आह्वान करेंगे।
