शेख आबिद रायपुर

शिक्षक के अधिकार कानून (आर.टी.ई.) में पहली बार प्रदेश के निजी स्कूलों में प्रवेश सन 2011 में हुआ था. 2011 से ही कक्षा पहली से पांचवी तक की प्रतिपूर्ति राशि 7000/-, छठवीं से आठवीं तक 11400/- प्रति विद्यार्थी / प्रति वर्ष तय की गई थी. राज्य सरकार ने कक्षा नवमी से बारहवीं को वर्ष 2018 में शिक्षक के अधिकार कानून के दायरे में लाया गया एवं राशि 15000/- प्रति विद्यार्थी / प्रति वर्ष तय की गई है.
प्रतिपूर्ति राशि सन 2011 से अभी तक नहीं बढ़ाई गई है. प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग संगठन 2016 से लगातार कर रहा है. लगातार मांग किये जाने के बावजूद अनदेखी के कारण संगठन ने जुलाई 2025 में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर से न्याय की गुहार लगाई थी. याचिका क्रमांक WPC 4988/2025 के आदेश दिनांक 19.9.2025 को माननीय उच्च न्यायालय ने 6 महीने के अंदर संगठन द्वारा दी गई रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय हेतु आदेशित किया था. (आदेश संलग्न )
आदेश के तुरंत बाद हम लगातार पिछले 6 महीना से स्कूल शिक्षक विभाग से उच्च न्यायालय के आदेश पर संवेदनशीलता से विचार करने को निवेदन कर रहे हैं. (पत्र संलग्न) स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इतने महत्वपूर्ण विषय पर अनदेखी किए जाने के बाद 1 मार्च को प्रदेश कार्यकारिणी ने असहयोग आंदोलन का ऐलान किया था.
असहयोग आंदोलन के चलते हम स्कूल शिक्षा विभाग के किसी पत्र / नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं. प्रदेश के समस्त जिलों में मार्च में ही अपने-अपने जिलों में असहयोग आंदोलन का ऐलान कर दिया था. (जिला संगठनों का पत्र संलग्न ).
स्कूल शिक्षा विभाग को लगातार हम इस मांग के पीछे जायज कारणों से अवगत कराते आ रहे हैं. राशि इतनी कम है की सभी विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. अन्य प्रदेशों में प्रतिपूर्ति राशि यहां से बहुत ज्यादा है एवं यह राज्य समय-समय पर इसका पुनः निर्धारण भी कर रहे हैं.
अन्य राज्यों की प्रतिपूर्ति राशि छत्तीसगढ़ से ज्यादा है जैसे असम-16396/-, चंडीगढ़-28176/-, गुजरात – 13000 /- हिमाचल प्रदेश – 34744/-, कर्नाटक -8000/- एवं 16000/-, महाराष्ट्र – 17670/- उड़ीसा -21247/-, राजस्थान – 10688/-, तमिलनाडु -11700/-, उत्तराखंड -16596/-, छत्तीसगढ़ से कम प्रतिपूर्ति राशि सिर्फ तीन प्रदेश बिहार, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की है
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन शालीनता से अपने आंदोलन की ओर अग्रसर है लेकिन लगातार हो रही अनदेखी को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस वर्ष शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रवेश न देने का निर्णय लिया है.
इस वर्ष प्रदेश के 6000 से ऊपर निजी स्कूल जिनमे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत इसी माह से प्रवेश प्रस्तावित है वहां हम लॉटरी के माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों की एडमिशन की प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेंगे. ऑनलाइन माध्यम से प्रवेश हेतु चयनित विद्यार्थियों को स्कूलों के प्रवेश देना होता है.
स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही एवं संवेदनहीन रवैये के कारण इस वर्ष प्रदेश के वंचित वर्ग के विद्यार्थियों का शिक्षक के अधिकार कानून (आर.टी.ई.) प्रवेश नहीं हो पायेगा.
गरीब / वंचित विद्यार्थियों की शिक्षा में गुणवत्ता की अनदेखी अब निजी स्कूल बर्दाश्त नहीं करेगा हमें मजबूरन ना चाहते हुए भी यह कठोर निर्णय लेना पड़ रहा है.