शल्य किया के समय मरीज को दर्द ना हो इसलिए प्राचीन काल से भारत चीन एवं मित्र मैं जड़ी बूटियों का प्रयोग किया जाता रहा है। सुश्रुत संहिता में अफीम एवं धतूरा के उपयोग का उल्लेख है।
आधुनिक समय में सन 1792 में में जोसेफ प्रीस्टले नाइट्रस ऑक्साइड की खोज की इसे लाफिंग गैस का नाम दिया गया । निश् चेतनाविज्ञान में सर्वप्रथम होरेस वेल्स दंत विज्ञान में दांत निकालने के दौरान निश्चेतना हेतु प्रयोग किया।
16 अक्टूबर 1846 बोस्टन के मैसेज शूट्स जनरल हॉस्पिटल में WTJ MORTON ने इयर से का प्रयोग पूर्ण निश्चेतना के लिए किया था। इसी स्वर्णिम दिन की याद में 16 अक्टूबर विश्व निश्चेतना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
WORLD ANAESTHESIA DAY के अवसर पर जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाता है। CARDIO PULMONARY RESUCSITATION, (CPR) की प्रक्रिया में निश्चेतना विज्ञानी का विशेष योगदान होता है। हम सभी निश्चेतना विज्ञानी इस दिन सीपीआर की ट्रेनिंग सामाजिक स्तर पर व्यक्त्ति समूह के बीच करते हैं इस वर्ष भी विभिन्न वि‌द्यालयों में इस प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही है
सन 1947 में समस्त देश में स्थित निषेध में विज्ञानियों को एक सूत्र में बांधने के लिए और एक सक्रिय संगठन बनाने के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियो लोजिस्ट के रूप में राष्ट्रीय स्तर के संगठन की स्थापना की गई। इस संगठन की कार्य विधियों में जन सामान्य के बीच में विशेषज्ञ के बारे में जानकारी देना एवं जागरुकता प्रदान करना मुख्य दिए ध्येय है।
आज के युग में निश्चेतना विज्ञानी का कार्य ऑपरेशन थिएटर में सीमित नहीं है। क्रिटिकल केयर यूनिट या आईसीयू, दर्द निवारण विज्ञान, पुनर्जीवन प्रक्रिया, कैजुअल्टी मैनेजमेंट में भी विशेष योगदान होता है।
हमारे कई सहयोगीयो ने फ्लाइट, ट्रेन, पार्क मेलो या जहां जनता का जमावड़ा होता है, ऐसी जगह पर कई वार सीपीआई के माध्यम से लोगों को पुत्रजीवन दिया हुआ है।
कोरोना कॉल मी निश्चेतना विज्ञानियों का महत्वपूर्ण किरदार था आईसीयू मैनेजमेंट कर अनेक व्यक्तियों का जीवन सुरक्षित किया गया। गंभीर मरीजों का वेंटीलेटर मैनेजमेंट और वेंटिलेटर नहीं होने की अवस्था में बेन सर्किट के माध्यम से उन्हें सपोर्ट दिया गया।
इंडियन सोसाइटी ऑफ़ एनेस्थीसियो लाजिस्ट की रायपुर इकाई ने अतीत में अनेक रीजनल कॉन्फ्रेंस जोनल कॉन्फ्रेंस एवं स्टेट कॉन्फ्रेंस का सफलतापूर्वक आयोजन किया है। आप सभी को बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि इस बार छत्तीसगढ़ में पहली बार रायपुर शहर में हमारी नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन 25 नवंबर से 30 नवंबर 2025 निश्चित किया गया है। इस राष्ट्रीय स्तर के निश्चेतना सम्मेलन में 50 अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व विशेषज्ञ तथा 3500 राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ अपने व्याख्यान और अनुभव के माध्यम से देश भर के निषेध में विषयों के बीच में विशेषज्ञ का मंथन करेंगे। इस कांफ्रेंस में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ़ एनेस्थीसियो लाजिस्ट (WFSA) का विशेष प्रतिनिधि मंडल भी शामिल हो रहा है। सन 2029 में WFSA की वर्ल्ड कांग्रेस भारत में हो, इसके लिए भी चर्चा की जाएगी।