छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में 10 अगस्त 2025 को एक विशेष सांस्कृतिक संगम का आयोजन किया जा रहा है चित्रकोट कन्नड्डा-छतीसगढ़ी संगम। यह आयोजन न किसी संस्था द्वारा प्रायोजित है. न ही किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित। यह एक नागरिक-प्रेरित, आत्मनिर्भर प्रयास है, जिसका उद्देश्य भारत की भाषाई विविधता में छिपी एकता को सामने लाना है।
इस आयोजन की शुरुआत चित्रकोट जलप्रपात पर एक जल संगम से होगी, जहाँ महानदी, कावेरी, और तुंगभद्रा का जल प्रतीकात्मक रूप से इंद्रावती में समाहित किया जाएगा। यह एक सांस्कृतिक संकेत होगा एक भारत, एक संस्कृति, एक भावना।
[06/08, 2:18 pm] shaikhabid7091: कार्यक्रम में कई विचारशील सत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों होंगी, जिनमें भारत की एकता के विभिन्न रंग उभरकर सामने आएंगे। यह आयोजन इस विश्वास को बल देता है कि भारत की सभी भाषाएं, सभी भारतीयों की अपनी भाषाएं हैं।
इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले विशिष्ट अतिथियों में शामिल हैं:
श्री सुमित अवस्थी, कंसल्टिंग एडिटर, NDTV इंडिया
श्री जयदीप कर्णिक, डिजिटल हेड, अमर उजाला
विंग कमांडर (सेनि.) सुधर्शन, पूर्व एयरफोर्स अफसर एवं कन्नड़ा लेखक
श्री कृष्णदेवराया, विजयनगर राजघराने के संरक्षक
श्री रवि कुमार अय्यर जी, भारतीय ज्ञान परंपरा के विद्वान
श्री तिरुमला देवराया, लेखक एवं विजयनगर अराविदु वंश के 21 वें वंशज
श्रीमती ऋतु वर्मा, प्रसिद्ध पंडवानी गायिका, छत्तीसगढ़
ಚಿತ್ರಕೋಟೆ ಕನ್ನಡ ಛತ್ತಿಸ್ತರ್ಹಿ ಸಂಗಮ चित्रकोट कन्नड़ा छत्तीसगढ़ी संगमा
श्रीमती निर्मला हेगड़े. यक्षगान कलाकार, सिरसी (कर्नाटक)
श्रीमती पिद्मनी ओक, सुगम संगीत गायिका (कन्नड़ा व हिंदी)
सुश्री ऋतिका यादव, छतीसगढ़ी फिल्म अभिनेत्री
श्री अनुपम वर्मा व श्री गंगासागर पांडा, छत्तीसगढ़ी सिनेमा से जुड़े फिल्म निर्माता
BJ नमित, प्रस्तोता एवं संस्कृति सेतु
यह कार्यक्रम आकाश वर्मा, एक टीवी न्यूज निर्माता, और उनकी धर्मपत्नी सीमा महोत्रा वर्मा, जम्मू-कश्मीर से आई एक शिक्षिका, की सच्ची निष्ठा और लगन का परिणाम है। इनका यह प्रयास पूरी तरह से आत्म-निधि से संचालित है और भारत की भाषाई व सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का एक विनम प्रयास है। इस आयोजन ने पहले ही नई पोढ़ी को प्रेरित करना शुरू कर दिया है- 10 वर्षीय ऋम्वी वर्मा, आयोजकों की सुपुत्री, जो विदेश में रहकर इस संगम से प्रेरित होकर कर्नाटक राज्य गीत सीख रही हैं।
यह संगम भारत की विविधता का नहीं बल्कि एकता की विभिन्न छायाओं का उत्सव है-जहाँ भारत की सभी भाषाएं हम सभी की हैं, और उनका उत्सव भारत की आत्मा का उत्सव है।
आप सभी मीडिया बंधुओं और नागरिकों से निवेदन है कि इस शुभ अवसर को देशभर में फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।
एक और विनती कर्नाटक के हमारे भाई और बहन अपनी भाषा को कन्नड़ के बजाए कन्नड़ा कहना पसंद करते हैं और अपने राज्य को कर्नाटक के बजाए कर्नाटका कहना पसंद करते है, हम इस भावना और स्थानीय चलन का सम्मान करते हुए इन शब्दों का उपयोग कर सकते हैं।
CHITRAKOTE KANNADA SANGAMA, CHHATTISGARH, 15. Jainam Vihar. Lalpur. Raipur Chhattisgarhi. Email: astalakshmiventures@gmail.com. Whatsapp: +919650090595
