एहतियात के तौर पर सातवीं और आठवीं कक्षा के 78 बच्चों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाना पड़ा। घटना के बाद अभिभावकों में गहरा आक्रोश है और स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन और मिड-डे मील संचालित करने वाले महिला समूह पर गंभीर आरोप लगाए। जानकारी मिलते ही पलारी SDM मौके पर पहुंचे और तुरंत जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में लापरवाही की पुष्टि होने पर मिड-डे मील संचालन कर रहे महिला स्व-सहायता समूह के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि मिड-डे मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई की निगरानी में भारी लापरवाही बरती जा रही है। बच्चों को परोसा गया खाना कथित रूप से कुत्ते के खाने के बाद बचा हुआ था, जिसे बिना जांच के छात्रों को दे दिया गया।
संदीप साहू, विधायक, कसडोल
“यह बेहद शर्मनाक और गंभीर मामला है। बच्चों की सेहत और भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
वीणा वर्मा, पीएससी प्रभारी, लक्षनपुर
“हमें जानकारी मिलते ही बच्चों की तुरंत जांच कराई गई और एहतियातन सभी को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।”
“खाना परोसने के बाद हमें पता चला कि इसमें गंदगी है और कुत्ते ने पहले खा लिया था, हम सब डर गए।”
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना है, लेकिन लक्षनपुर की यह घटना इस योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी कई बार घटिया गुणवत्ता और गंदगी की शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जब मामला बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा है, प्रशासन पर दबाव है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाए।
