पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में पुलिस कमिश्नरेट रायपुर द्वारा शहर की यातायात व्यवस्था में *चरणबद्ध सुधार लाने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न सुधारात्मक एवं जनजागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। यातायात पुलिस का उद्देश्य नागरिकों विशेषकर नई पीढ़ी में सुरक्षित एवं अनुशासित रोड कल्चर विकसित करना भी है
इसी उद्देश्य को लेकर शहर के विभिन्न विद्यालयों के बाहर नाबालिग बच्चों द्वारा मोटरसाइकिल चलाकर विद्यालय आने तथा क्षमता से अधिक स्कूली बच्चों को बैठाकर ऑटो-रिक्शा संचालित करने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत कुल 145 प्रकरणों में वैधानिक कार्रवाई की गई।
अभियान के दौरान KPS स्कूल कमल विहार, आत्मानंद स्कूल पचपेड़ी नाका, भारत माता स्कूल टाटीबंध, जे.आर. दानी स्कूल कालीबाड़ी, देशबंधु स्कूल अग्रसेन चौक, रेयान स्कूल अवंती विहार, केंद्रीय विद्यालय WRS कॉलोनी सहित शहर के अनेक विद्यालयों के बाहर विशेष जांच की गई। साथ ही क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर संचालित ऑटो-रिक्शाओं के विरुद्ध भी प्रभावी कार्रवाई की गई।
यातायात पुलिस द्वारा केवल चालानी कार्रवाई तक सीमित न रहते हुए विद्यालय प्राचार्यों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय परिसर में नाबालिग विद्यार्थियों के वाहन लेकर आने पर रोक लगाने, अभिभावकों को नियमित रूप से जागरूक करने तथा सुरक्षित स्कूल परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त जिन नाबालिग बच्चों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, उनके अभिभावकों को यातायात मुख्यालय, कालीबाड़ी में बुलाकर काउंसलिंग की गई।इस दौरान सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित प्रेजेंटेशन एवं वीडियो के माध्यम से यह बताया गया कि कम आयु में वाहन चलाना बच्चों के जीवन के लिए कितना गंभीर जोखिम है। उन्हें *यह भी अवगत कराया गया कि नाबालिग को मोटर वाहन उपलब्ध कराना मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय है तथा इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
अभिभावकों को समझाया गया कि कुछ मिनटों की सुविधा के लिए बच्चों के हाथ में मोटरसाइकिल देना भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। कम उम्र में वाहन मिलने से बच्चे तेज गति से वाहन चलाना, स्टंट करना, अनावश्यक रूप से घूमना तथा यातायात नियमों की अनदेखी जैसी प्रवृत्तियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। ऐसी एक छोटी-सी लापरवाही किसी भी परिवार की खुशियां छीन सकती है।
यातायात पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए स्कूल बस, अधिकृत ऑटो-रिक्शा (क्षमता के अनुरूप) अथवा अन्य सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का उपयोग करें तथा किसी भी परिस्थिति में नाबालिग बच्चों को मोटर वाहन उपलब्ध न कराएं।
इस अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि—
नाबालिग बच्चों में सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जागरूकता विकसित करना।
अभिभावकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना।
विद्यालय, अभिभावक एवं पुलिस के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित यातायात संस्कृति का निर्माण करना।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना तथा किसी भी परिवार की खुशियां असमय छिनने से बचाना।
बच्चों में बचपन से ही अनुशासन, जिम्मेदारी एवं सुरक्षित नागरिक बनने के संस्कार विकसित करना।
पुलिस उपायुक्त (यातायात) डॉ. अर्चना झा ने कहा कि यातायात व्यवस्था में स्थायी सुधार केवल चालान से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, विद्यालय, अभिभावकों एवं बच्चों की सहभागिता आवश्यक है। इसलिए यह विशेष अभियान निरंतर एवं व्यवस्थित रूप से आगे भी जारी रहेगा, ताकि आने वाली पीढ़ी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक, जिम्मेदार एवं अनुशासित नागरिक बन सके और रायपुर में सुरक्षित यातायात संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।